Pregnancy Calculator - गर्भावस्था कैलकुलेटर
गर्भावस्था कैलकुलेटर (Pregnancy Calculator) एक मुफ्त ऑनलाइन टूल है जो आपकी अंतिम माहवारी की तारीख (LMP) या गर्भधारण की तारीख के आधार पर आपकी गर्भावस्था का सप्ताह, त्रैमासिक (trimester), और अनुमानित प्रसव तिथि तुरंत निकालता है। यह भारतीय महिलाओं के लिए ICMR (Indian Council of Medical Research) दिशानिर्देशों के अनुसार डिज़ाइन किया गया है।
गर्भावस्था कैलकुलेटर क्या है? (What is Pregnancy Calculator?)
गर्भावस्था कैलकुलेटर एक चिकित्सकीय उपकरण है जो गर्भवती महिला को उसकी गर्भावस्था के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करता है। यह निम्नलिखित की गणना करता है:
- वर्तमान गर्भावस्था सप्ताह - आप गर्भावस्था के कितने सप्ताह और दिन में हैं
- त्रैमासिक (Trimester) - पहली, दूसरी या तीसरी त्रैमासिक
- प्रसव तिथि (Due Date) - बच्चे के जन्म की अनुमानित तारीख
- बच्चे का विकास - वर्तमान सप्ताह में शिशु का आकार और विकास
गर्भावस्था की गणना कैसे की जाती है?
डॉक्टर गर्भावस्था की गणना अंतिम माहवारी के पहले दिन (LMP) से करते हैं। यद्यपि गर्भधारण वास्तव में 2 सप्ताह बाद (ओव्यूलेशन के समय) होता है, लेकिन चिकित्सकीय रूप से गर्भावस्था को LMP से गिना जाता है।
गर्भावस्था की अवधि: 40 सप्ताह (280 दिन) या लगभग 9 महीने और 7 दिन
नेगेल का नियम (Naegele’s Rule): प्रसव तिथि = LMP + 280 दिन (या LMP की तारीख से 3 महीने घटाएं और 7 दिन जोड़ें)
उदाहरण: यदि आपकी अंतिम माहवारी 1 जनवरी 2026 को थी:
- प्रसव तिथि = 1 अक्टूबर 2026 (1 जनवरी + 9 महीने 7 दिन)
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गर्भावस्था के तीन त्रैमासिक (Three Trimesters of Pregnancy)
गर्भावस्था को तीन त्रैमासिकों में विभाजित किया गया है, प्रत्येक लगभग 13 सप्ताह का:
पहली त्रैमासिक (First Trimester): सप्ताह 1-13
माँ में परिवर्तन:
- मॉर्निंग सिकनेस (मतली और उल्टी)
- थकान और नींद में वृद्धि
- स्तनों में सूजन और दर्द
- बार-बार पेशाब आना
- भोजन की इच्छा में बदलाव
- मूड स्विंग्स (मनोदशा में बदलाव)
बच्चे का विकास:
- सप्ताह 4: हृदय धड़कना शुरू होता है
- सप्ताह 6: मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी विकसित होने लगती है
- सप्ताह 8: अंग और अंगुलियां बनना शुरू होती हैं
- सप्ताह 12: बच्चा लगभग 6 सेमी लंबा होता है
- सप्ताह 13: लिंग पहचाना जा सकता है (अल्ट्रासाउंड द्वारा)
महत्वपूर्ण जांचें:
- पहली प्रसवपूर्व जांच (6-8 सप्ताह)
- रक्त परीक्षण (ब्लड ग्रुप, Rh फैक्टर, हीमोग्लोबिन)
- NT स्कैन (11-13 सप्ताह) - डाउन सिंड्रोम की जांच
- फोलिक एसिड सप्लीमेंट शुरू करें
दूसरी त्रैमासिक (Second Trimester): सप्ताह 14-27
माँ में परिवर्तन:
- मॉर्निंग सिकनेस कम हो जाती है
- ऊर्जा का स्तर बढ़ता है (सबसे आरामदायक अवधि)
- पेट दिखना शुरू होता है
- बच्चे की हलचल महसूस होती है (18-20 सप्ताह)
- पीठ दर्द, पैर में ऐंठन
- त्वचा में परिवर्तन (काले धब्बे, खिंचाव के निशान)
बच्चे का विकास:
- सप्ताह 16: बच्चा सुनना शुरू करता है
- सप्ताह 20: बच्चा लगभग 25 सेमी लंबा, वजन 300 ग्राम
- सप्ताह 23: त्वचा के नीचे वसा जमा होने लगती है
- सप्ताह 27: आंखें खोलना-बंद करना शुरू
महत्वपूर्ण जांचें:
- एनोमली स्कैन (18-20 सप्ताह) - शारीरिक विकृतियों की जांच
- ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट (24-28 सप्ताह) - गर्भकालीन मधुमेह की जांच
- आयरन और कैल्शियम सप्लीमेंट
तीसरी त्रैमासिक (Third Trimester): सप्ताह 28-40
माँ में परिवर्तन:
- सांस लेने में कठिनाई (गर्भाशय फेफड़ों पर दबाव)
- बार-बार पेशाब (गर्भाशय मूत्राशय पर दबाव)
- नींद में कठिनाई
- ब्रेक्सटन हिक्स संकुचन (झूठे प्रसव पीड़ा)
- पैरों और हाथों में सूजन
- थकान और बेचैनी
बच्चे का विकास:
- सप्ताह 32: बच्चा सिर नीचे की स्थिति में आ जाता है
- सप्ताह 36: फेफड़े पूरी तरह विकसित हो जाते हैं
- सप्ताह 37: बच्चा “फुल टर्म” माना जाता है
- सप्ताह 40: जन्म के लिए तैयार, औसत वजन 3-3.5 किग्रा
महत्वपूर्ण जांचें:
- नियमित प्रसवपूर्व जांचें (हर 2 सप्ताह, फिर हर सप्ताह)
- NST (Non-Stress Test) - बच्चे की हृदय गति की निगरानी
- सोनोग्राफी - बच्चे की स्थिति और एमनियोटिक द्रव की जांच
- स्ट्रेप्टोकोकस बी संस्कृति (36 सप्ताह)
गर्भावस्था में आहार और पोषण (Diet & Nutrition During Pregnancy)
भारतीय गर्भवती महिलाओं के लिए ICMR और NIN (National Institute of Nutrition) द्वारा अनुशंसित आहार:
आवश्यक पोषक तत्व
फोलिक एसिड (Folic Acid):
- आवश्यकता: 500-600 mcg प्रतिदिन
- स्रोत: हरी पत्तेदार सब्जियां (पालक, मेथी), दालें, संतरा
- महत्व: न्यूरल ट्यूब दोष रोकता है
आयरन (Iron):
- आवश्यकता: 35-38 mg प्रतिदिन
- स्रोत: पालक, चुकंदर, अनार, दालें, सूखे मेवे, गुड़
- महत्व: एनीमिया रोकता है, ऑक्सीजन परिवहन
कैल्शियम (Calcium):
- आवश्यकता: 1200 mg प्रतिदिन
- स्रोत: दूध, दही, पनीर, रागी, तिल के बीज
- महत्व: बच्चे की हड्डियों और दांतों का विकास
प्रोटीन (Protein):
- आवश्यकता: अतिरिक्त 23 ग्राम प्रतिदिन
- स्रोत: दालें, दूध, अंडे, चिकन, मछली, मूंगफली
- महत्व: बच्चे के ऊतकों का निर्माण
ओमेगा-3 फैटी एसिड:
- स्रोत: अखरोट, अलसी के बीज, मछली (सालमन, सार्डिन)
- महत्व: मस्तिष्क और आंखों का विकास
भारतीय गर्भावस्था आहार योजना
सुबह का नाश्ता:
- दलिया/पोहा/उपमा + दूध
- फल (केला, सेब, अनार)
- मूंगफली चिक्की या लड्डू
मध्य-सुबह:
- नारियल पानी/छाछ
- ड्राई फ्रूट्स (बादाम, अखरोट, किशमिश)
दोपहर का भोजन:
- रोटी/चावल
- दाल (मूंग/अरहर/मसूर)
- सब्जी (पालक, भिंडी, गाजर)
- दही/छाछ
- सलाद
शाम का नाश्ता:
- स्प्राउट्स चाट
- फल/फ्रूट जूस
- दूध + बादाम
रात का खाना:
- रोटी/चावल
- सब्जी/करी
- दाल
- गुड़/खजूर
बचने योग्य खाद्य पदार्थ
- कच्चा/अधपका मांस और अंडे - साल्मोनेला संक्रमण का खतरा
- कच्चा पपीता और अनानास - गर्भाशय संकुचन कर सकते हैं
- शराब और तंबाकू - भ्रूण को गंभीर नुकसान
- अधिक कैफीन - 200mg/दिन से अधिक नहीं
- प्रोसेस्ड और जंक फूड - पोषण मूल्य कम
- अनपाश्चुरीकृत दूध/चीज - लिस्टेरिया संक्रमण
गर्भावस्था में व्यायाम और योग (Exercise & Yoga)
सुरक्षित व्यायाम
चलना (Walking):
- प्रतिदिन 30 मिनट
- सभी त्रैमासिकों में सुरक्षित
- रक्त संचार में सुधार
तैराकी (Swimming):
- जोड़ों पर कम दबाव
- पूरे शरीर का व्यायाम
- दूसरी त्रैमासिक में विशेष रूप से अच्छा
प्रसवपूर्व योग (Prenatal Yoga):
- वज्रासन - पाचन में सुधार
- बद्धकोणासन (तितली आसन) - कूल्हों को खोलता है
- मार्जरीआसन (बिल्ली आसन) - पीठ दर्द में राहत
- शवासन - विश्राम और तनाव कम करना
पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज (Kegel):
- पेल्विक मांसपेशियों को मजबूत करती है
- प्रसव में मदद करती है
- मूत्र असंयम रोकती है
बचने योग्य व्यायाम
- उच्च तीव्रता वाले कार्डियो
- संपर्क खेल (फुटबॉल, बास्केटबॉल)
- गिरने का जोखिम वाले व्यायाम
- पीठ के बल लेटकर व्यायाम (20 सप्ताह के बाद)
- गर्म योग या साउना
गर्भावस्था में सामान्य समस्याएं और समाधान
मॉर्निंग सिकनेस (Morning Sickness)
लक्षण: मतली और उल्टी, विशेष रूप से सुबह उपाय:
- सुबह उठते ही सूखा बिस्किट/मूंगफली खाएं
- छोटे-छोटे भोजन बार-बार करें
- अदरक की चाय पीएं
- खट्टे फलों का सेवन करें (नींबू, संतरा)
कब्ज (Constipation)
कारण: हार्मोनल परिवर्तन, आयरन सप्लीमेंट उपाय:
- अधिक फाइबर (फल, सब्जियां, साबुत अनाज)
- प्रतिदिन 8-10 गिलास पानी पीएं
- नियमित व्यायाम और चलना
- पपीता, अंजीर, प्रून खाएं
पीठ दर्द (Back Pain)
कारण: बढ़ता हुआ वजन, पोस्चर में बदलाव उपाय:
- सही पोस्चर बनाए रखें
- नियमित स्ट्रेचिंग करें
- गर्म या ठंडी सिकाई
- मातृत्व बेल्ट का उपयोग करें
- आरामदायक जूते पहनें
एडिमा (Edema - सूजन)
लक्षण: पैरों, टखनों और हाथों में सूजन उपाय:
- पैरों को ऊंचा करके आराम करें
- नमक का सेवन कम करें
- पर्याप्त पानी पीएं
- टाइट कपड़े और जूते न पहनें
गर्भकालीन मधुमेह (Gestational Diabetes)
जोखिम: भारतीय महिलाओं में अधिक प्रचलित प्रबंधन:
- रक्त शर्करा की नियमित निगरानी
- कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाला आहार
- नियमित व्यायाम
- डॉक्टर की सलाह पर इंसुलिन
प्रसव के चेतावनी संकेत (Warning Signs)
तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें यदि:
- योनि से रक्तस्राव - किसी भी मात्रा में
- गंभीर पेट दर्द - ऐंठन या तीव्र दर्द
- पानी की थैली फटना - तरल पदार्थ का रिसाव
- बच्चे की गति में कमी - 24 घंटे में 10 से कम हलचल
- गंभीर सिरदर्द - दृष्टि में धुंधलापन के साथ
- चेहरे और हाथों में अचानक सूजन - प्री-एक्लेम्पसिया का संकेत
- तेज बुखार - 100.4°F (38°C) से ऊपर
- लगातार उल्टी - निर्जलीकरण का कारण
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
गर्भावस्था की गणना कैसे की जाती है?
गर्भावस्था की गणना आपकी अंतिम माहवारी के पहले दिन (LMP) से की जाती है। यद्यपि वास्तविक गर्भधारण ओव्यूलेशन के समय (लगभग 2 सप्ताह बाद) होता है, चिकित्सकीय रूप से गर्भावस्था 40 सप्ताह की मानी जाती है जो LMP से गिनी जाती है।
प्रसव तिथि कितनी सटीक है?
केवल 5% बच्चे अनुमानित प्रसव तिथि पर जन्म लेते हैं। अधिकांश बच्चे प्रसव तिथि से 2 सप्ताह पहले या 2 सप्ताह बाद तक पैदा होते हैं। यह पूरी तरह सामान्य है। प्रसव तिथि एक अनुमान है, गारंटी नहीं।
मैं किस त्रैमासिक में हूं?
- पहली त्रैमासिक: सप्ताह 1-13
- दूसरी त्रैमासिक: सप्ताह 14-27
- तीसरी त्रैमासिक: सप्ताह 28-40
हमारा कैलकुलेटर आपकी LMP के आधार पर स्वचालित रूप से आपकी त्रैमासिक की गणना करता है।
अगर मेरी माहवारी अनियमित है तो क्या करूं?
यदि आपकी माहवारी अनियमित है, तो LMP आधारित गणना सटीक नहीं हो सकती। ऐसे मामलों में:
- प्रारंभिक अल्ट्रासाउंड (6-12 सप्ताह) सबसे सटीक प्रसव तिथि देता है
- गर्भधारण की तारीख का उपयोग करें (यदि ज्ञात हो)
- डॉक्टर विकास के आधार पर प्रसव तिथि समायोजित कर सकते हैं
गर्भावस्था में कितना वजन बढ़ना चाहिए?
भारतीय महिलाओं के लिए अनुशंसित वजन वृद्धि:
- सामान्य BMI (18.5-22.9): 11-16 किग्रा
- कम वजन (BMI < 18.5): 12.5-18 किग्रा
- अधिक वजन (BMI 23-24.9): 7-11.5 किग्रा
- मोटापा (BMI ≥ 25): 5-9 किग्रा
गर्भावस्था में यात्रा सुरक्षित है?
पहली और दूसरी त्रैमासिक (सप्ताह 14-28): यात्रा के लिए सबसे सुरक्षित समय तीसरी त्रैमासिक (सप्ताह 28+): लंबी यात्रा से बचें, विशेष रूप से सप्ताह 36 के बाद
सुझाव:
- हवाई यात्रा: अधिकांश एयरलाइंस 36 सप्ताह तक की अनुमति देती हैं
- डॉक्टर से फिटनेस सर्टिफिकेट लें
- लंबी यात्रा में बार-बार हिलें-डुलें
- हाइड्रेटेड रहें
क्या गर्भावस्था में सेक्स सुरक्षित है?
हां, अधिकांश गर्भावस्थाओं में सेक्स पूरी तरह सुरक्षित है। हालांकि, इन स्थितियों में बचें:
- प्लेसेंटा प्रिविया (गर्भनाल गर्भाशय मुख के पास)
- गर्भाशय ग्रीवा की अक्षमता
- समय से पहले प्रसव का इतिहास
- रक्तस्राव या ऐंठन
- पानी की थैली फटने के बाद
बच्चे की हलचल कब महसूस होगी?
- पहली गर्भावस्था: 18-20 सप्ताह
- बाद की गर्भावस्था: 16-18 सप्ताह (पहले महसूस हो सकती है)
प्रारंभ में हलचल हल्की होती है (तितली की तरह), बाद में मजबूत किक्स और पंच महसूस होते हैं। सप्ताह 28 के बाद, प्रतिदिन बच्चे की हलचल गिनें।
निष्कर्ष (Conclusion)
गर्भावस्था कैलकुलेटर आपकी गर्भावस्था की यात्रा को ट्रैक करने का एक आवश्यक उपकरण है। यह आपको अपनी वर्तमान त्रैमासिक, बच्चे के विकास और अनुमानित प्रसव तिथि के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करता है।
भारतीय गर्भवती महिलाओं के लिए यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है कि वे ICMR और NIN दिशानिर्देशों का पालन करें, संतुलित आहार लें, नियमित व्यायाम करें और सभी प्रसवपूर्व जांचों में भाग लें।
याद रखें कि यह कैलकुलेटर एक अनुमान प्रदान करता है। अपनी गर्भावस्था की व्यक्तिगत देखभाल और निगरानी के लिए हमेशा योग्य स्त्री रोग विशेषज्ञ से नियमित परामर्श करें।
अपनी गर्भावस्था का सप्ताह जानने के लिए ऊपर दिए गए मुफ्त कैलकुलेटर का उपयोग करें!
अस्वीकरण (Disclaimer): यह कैलकुलेटर केवल शैक्षिक और सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यह चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह और देखभाल के लिए हमेशा स्त्री रोग विशेषज्ञ या प्रसूति विशेषज्ञ से परामर्श करें।